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100 साल पहले ब्रिटिश हुकूमत ने आज ही के दिन ताजमहल को लेकर लिया था बड़ा फैसला, अब सामने आ रहे उसके नतीजे

दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल को संरक्षित स्मारक घोषित करने का प्रीलिमिनरी नोटिफिकेशन आज के ही दिन 100 वर्ष पूर्व हुआ था। ब्रिटिश काल में 18 नवंबर, 1920 को ताजमहल को संरक्षित स्मारक घोषित करने को पहला कदम उठाया गया था। सौ वर्षों के सफर में ताजमहल भारत के पर्यटन की पहचान तो बना ही, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आश्रित पांच लाख लोगों की आजीविका का जरिया भी बना।

ताजमहल को संरक्षित स्मारक घोषित करने को ब्रिटिश काल में उठाए गए कदम का उल्लेख डी. दयालन (आगरा में अधीक्षण पुरातत्वविद के पद पर तैनात रहे) ने अपनी किताब ताजमहल एंड इट्स कंजर्वेशन में किया गया है। दयालन लिखते हैं कि ताजमहल को राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित करने के लिए प्रीलिमिनरी नोटिफिकेशन 18 नवंबर, 1920 को हुआ था। दो दिन बाद 20 नवंबर, 1920 को यह प्रकाशित हुआ था। ताजमहल को संरक्षित स्मारक घोषित करने का प्रीलिमिनरी नोटिफिकेशन 22 दिसंबर, 1920 को कंफर्म किया गया था। ताज को संरक्षित स्मारक घोषित करने को ब्रिटिश काल में उठाए गए पहले कदम के सौ वर्ष बुधवार को पूरे होने जा रहे हैं। ताजमहल आज भारतीय पर्यटन की शान है। काेराेना काल में इंटरनेशनल फ्लाइट और टूरिस्ट वीजा के अभाव में विदेशी पर्यटक यहां नहीं आ पा रहे हैं, लेकिन दूतावासों, नौकरी के सिलसिले में भारत आए विदेशी ताजमहल के दीदार को आगरा आ रहे हैं। कोरोना काल में लागू कैपिंग के बावजूद भारतीय पर्यटक भी प्रतिदिन अच्छी संख्या में आ रहे हैं।

अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि फाइनल नोटिफिकेशन होने पर ही स्मारक संरक्षित घोषित होता है। प्रीलिमिनरी नोटिफिकेशन पर कोई आपत्ति नहीं आने पर 22 दिसंबर, 1920 को प्रीलिमिनरी नोटिफिकेशन कंफर्म होने के साथ ताजमहल राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था।

अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार के अनुसार ताजमहल के साथ आगरा किला और फतेहपुर सीकरी को भी संरक्षित स्मारक घोषित करने को प्रीलिमिनरी नोटिफिकेशन किया गया था। दोनों स्मारकों का प्रीलिमिनरी नोटिफिकेशन ताजमहल के साथ ही कंफर्म किया गया था। आगरा किला और फतेहपुर सीकरी भी ताजमहल के समान विश्व धरोहर हैं।

1808 में बनी पहली रिपोर्ट

वर्ष 1808 में लेफ्टिनेंट कर्नल काइड ने सर्वे के बाद आगरा के स्मारकों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। वर्ष 1810 में कैप्टन टेलर को ताजमहल के संरक्षण के लिए तैनात किया गया, बाद में उन्होंने चीफ इंजीनियर के रूप में काम किया। वर्ष 1861 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की स्थापना हुई। वर्ष 1878 में इंडियन ट्रीजर-ट्रोव एक्ट बनाया गया। 18 मार्च, 1904 में प्राचीन स्मारक संरक्षण एक्ट लागू हुआ।

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