आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पहली तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है, जिसमें पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा के दिव्य रूपों की उपासना की जाती है। हालांकि इस साल नवरात्र महज 8 दिन तक ही रहेंगे, जो 7 अक्टूबर से शुरू होकर 14 अक्टूबर को समाप्त हो जाएंगे।
शरद ऋतु में पड़ने वाली नवरात्रि को मुख्य नवरात्र माना जाता है। इस दौरान देशभर में धूम रहती है, खासतौर पर बंगाल और गुजरात जैसे राज्यों में इस त्योहार की सबसे अधिक रौनक देखने को मिलती है। जहां बंगला में दुर्गा पूजा के लिए खूबसूरत और आकर्षक पंडाल लगाए जाते हैं। वहीं गुजरात में जगह-जगह पर गरबा का आयोजन किया जाता है।
कलश स्थापना का समय
नवरात्रि के इस त्योहार में कुछ लोग अपने घरों माता की चौकी लगाकर अखंड ज्योत जलाते हैं। नवरात्रि के पहले दिन प्रात:काल देवी दुर्गा की मूर्ति और कलश की स्थापना की जाती हैं। मुहूर्त के अनुसार कलश की स्थापना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इसक बार 7 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 15 मिनट से शुभ मुहूर्त शुरू होगा, जो 7 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।
मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा विधि
नवरात्रि के दिन सुबह उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहन लें। फिर पूरे घर में गंगा जल का छिड़काव करें। कलश स्थापना करके मां दुर्गा की पूजा शुरू करें और व्रत रखने का संकल्प लें। इसके बाद देवी दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा करें। माता शैलपुत्री को लाल फूल, सिंदुर, अक्षत और धूप आदि चढ़ाएं। इसके बाद शैलपुत्री देवी के मंत्रों का उच्चारण करें।
फिर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंतर में घी के दीपक से आरती करें। मां शैलपुत्री को सफेद रंग काफी प्रिय है, आप चाहें तो उन्हें सफेद रंग की बर्फी का भी भोग लगा सकते हैं।
क्यों मनाया जाता है नवरात्रि का त्योहार: हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार से जुड़ी दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार महिषासुर नामक राक्षस ने भगवान ब्रह्मा से वरदान मांगा था कि देव, दानव या फिर धरती पर रहने वाला कोई भी मनुष्य उसका वध ना कर सके। ब्रह्मा जी का आशीर्वाद पाने के बाद राक्षस ने तीनों लोगों में उत्पात मचाना शुरू कर दिया। जिसके बाद महिषासुर के आतंक से त्रस्त आकर देवताओं ने देवी दुर्गा का आवाहन किया। 9 दिनों तक मां दुर्गा और महिषासुर के बीच भीषण युद्ध चला था। दसवें दिन मां दुर्गा ने भयानक राक्षस महिषासुर का वध कर दिया।
दूसरी कथा के अनुसार भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले मां दुर्गा की आराधना की थी। भगवान राम की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी दुर्गा ने उन्हें जीत का आशीर्वाद दिया, जिसके बाद राम जी ने दसवें दिन रावण को हराकर लंका पर विजय प्राप्त की थी। इसलिए नवरात्रि की दसवें दिन ‘विजयदशमी’ यानी दशहरा का त्योहार मनाया जाता है।
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