Homeसरकारी योजनाISM 2.0: आवेदन, पात्रता और सब्सिडी की पूरी जानकारी

ISM 2.0: आवेदन, पात्रता और सब्सिडी की पूरी जानकारी

ISM 2.0: भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) को मंज़ूरी दी है। यह योजना देश को चिप निर्माण, डिज़ाइन, उपकरण, सामग्री और आपूर्ति श्रृंखला के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत सिर्फ़ चिप्स का उपभोक्ता न रहे, बल्कि उनका निर्माता और निर्यातक भी बने।

ISM 2.0 क्या है?

ISM 2.0, India Semiconductor Mission का दूसरा चरण है। इसका उद्देश्य केवल सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को विकसित करना है। इसमें चिप डिज़ाइन, निर्माण उपकरण, विशेष रसायन, गैसें, सामग्री और उन्नत पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।

पिछले चरण में जहां मुख्य फोकस फैब्रिकेशन, असेंबली और टेस्टिंग पर था, वहीं ISM 2.0 का दायरा उससे कहीं बड़ा है। यह मिशन उद्योग, शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स और तकनीकी कंपनियों को एक साथ जोड़कर मजबूत सेमीकंडक्टर आधार तैयार करना चाहता है।

कितना अनुदान मिलेगा?

ISM 2.0 के तहत सहायता परियोजना के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिलिकॉन फैब्स को परियोजना लागत का 40% तक, डिस्प्ले और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्स को 35% तक, और सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष रसायन, गैसें तथा सामग्री बनाने वाली इकाइयों को 30% तक प्रोत्साहन मिल सकता है।

इसके अलावा, एडवांस्ड पैकेजिंग इकाइयों को 35% तक और पारंपरिक पैकेजिंग को 25% तक सहायता मिलने की संभावना है। रिसर्च, डिज़ाइन, प्रशिक्षण और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों के लिए भी विशेष समर्थन का प्रावधान रखा गया है।

आवेदन प्रक्रिया कैसी होगी?

इस योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया परियोजना आधारित होगी। इच्छुक कंपनियों को अपनी यूनिट, निवेश, तकनीक, उत्पादन योजना और स्थान से जुड़ी विस्तृत जानकारी के साथ आवेदन करना होगा। आवेदन का मूल्यांकन तकनीकी और वित्तीय दोनों स्तरों पर किया जाएगा।

आम तौर पर प्रक्रिया इस तरह आगे बढ़ेगी:

  1. आधिकारिक दिशा-निर्देशों को पढ़ना।
  2. पात्र श्रेणी का चयन करना।
  3. परियोजना प्रस्ताव तैयार करना।
  4. आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ आवेदन करना।
  5. मूल्यांकन और अनुमोदन प्रक्रिया से गुजरना।
  6. मंज़ूरी मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से प्रोत्साहन प्राप्त करना।

सरकार इस योजना में माइलस्टोन-आधारित सहायता प्रणाली अपना सकती है, यानी परियोजना के कामकाज की प्रगति के अनुसार अनुदान जारी होगा।

कौन-कौन से दस्तावेज़ चाहिए?

आवेदन के समय आम तौर पर निम्न दस्तावेज़ मांगे जा सकते हैं:

  • कंपनी का पंजीकरण प्रमाणपत्र।
  • PAN और GST विवरण।
  • विस्तृत परियोजना रिपोर्ट।
  • तकनीकी और उत्पादन योजना।
  • भूमि, संयंत्र या स्थान से संबंधित दस्तावेज़।
  • वित्तीय विवरण और फंडिंग का प्रमाण।
  • निदेशक मंडल का अनुमोदन या अधिकृत पत्र।
  • यदि लागू हो, तो MSME, स्टार्टअप या शैक्षणिक संस्थान से संबंधित प्रमाण।

यदि आवेदन डिज़ाइन, R&D या प्रशिक्षण से जुड़ा है, तो उसके लिए अलग से लैब सेटअप, कोर्स प्लान, साझेदारी समझौता और बजट विवरण भी मांगा जा सकता है।

किसे मिलेगा लाभ?

यह योजना सेमीकंडक्टर निर्माण कंपनियों, चिप डिज़ाइन फर्मों, पैकेजिंग यूनिटों, उपकरण निर्माताओं, रसायन और गैस आपूर्तिकर्ताओं, स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और प्रशिक्षण केंद्रों के लिए उपयोगी हो सकती है। इसका मकसद केवल बड़े उद्योगों को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है।

जो कंपनियां भारत में चिप इकोसिस्टम के किसी भी हिस्से में निवेश करना चाहती हैं, उनके लिए ISM 2.0 एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। इससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता घटेगी और तकनीकी क्षमता मजबूत होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

आज के समय में सेमीकंडक्टर हर आधुनिक तकनीक की रीढ़ बन चुके हैं। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण, एआई सिस्टम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर—सब कुछ चिप्स पर निर्भर है। ऐसे में भारत का इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।

ISM 2.0 भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि यह योजना सफल रही, तो आने वाले वर्षों में भारत तकनीकी निर्माण के बड़े केंद्रों में शामिल हो सकता है।

निष्कर्ष

ISM 2.0 भारत की औद्योगिक और तकनीकी नीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह योजना न सिर्फ़ चिप निर्माण को बढ़ावा देगी, बल्कि देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर भी ले जाएगी। उचित क्रियान्वयन के साथ यह योजना भारत के लिए रोजगार, निवेश और नवाचार के नए अवसर खोल सकती है।

ISM 2.0 सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की सबसे महत्वाकांक्षी पहलों में से एक है, जो देश को तकनीक के भविष्य के लिए तैयार करने का काम कर सकती है।

Latest Hardoi News के लिए क्लिक करें..

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img
- Advertisment -

ताज़ा ख़बरें

सरकारी योजना