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Fake Encounter: फर्जी एनकाउंटर में 5 पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास, CBI अदालत ने सुनाई सजा

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के एटा जिले में 16 वर्ष पहले राजाराम की हत्या कर एनकाउंटर का रूप देने के मामले में दोषी पांच पुलिस वालों को बुधवार को सीबीआई की अदालत ने आजीवन कारावास और 33-33 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है. वहीं चार पुलिसकर्मियों को 5-5 साल जेल व 11-11 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। एक आरोपी पुलिसकर्मी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।

पंवन सिंह, पाल सिंह ठनवा, सरनाम सिंह, राजेंद्र प्रसाद और मोहकम सिंह को आजीवन कारावास और 33-33 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है. वहीं बलदेव सिंह, अजय कुमार, अवधेश रावत और सुमेर सिंह को 5- 5 वर्ष कारावास और 11- 11 हजार अर्थदण्ड लगाया गया है।

2009 में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद 13 साल चली सुनवाई में 202 लोगों की गवाही के बाद साबित हुआ कि सिपाही राजेंद्र ने राजाराम से अपने घर की रसोई में काम कराया था। राजाराम ने मजदूरी के पैसे मांगे थे। सिपाही ने पैसे देने से मना किया तो राजाराम पैसे लेने पर अड़ गया था।

इसी बात पर सिपाही राजेंद्र ने एनकाउंटर साजिश रच ली। राजाराम पर एक भी केस दर्ज न होने के बाद भी सिढ़पुरा थाने की पुलिस ने उसे लुटेरा बताया। उसका शव परिवार वालों को देने के बजाय खुद ही अज्ञात में दाह संस्कार कर दिया था।

सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक अनुराग मोदी ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट में दर्ज परिवाद में राजाराम की पत्नी संतोष कुमारी ने बताया था कि उसके पति को थाना सिढ़पुरा जिला एटा के पुलिसकर्मी पवन सिंह, पालसिंह ठेनुवा, अजंट सिंह, सरनाम सिंह और राजेन्द्र प्रसाद ने 18 अगस्त 2006 को दोपहर तीन बजे उठा लिया था।

पुलिस न तो उसे लुटेरा साबित कर सकी और न ही एनकाउंटर को असली।

उसने बताया कि उसने पति को पुलिस से छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने कहा कि पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं, अगले दिन छोड़ देंगे। 28 अगस्त 2006 को थाना सिढ़पुरा की पुलिस ने एक लुटेरे की एनकाउंटर में मौत बताई। उसके शव को अज्ञात में जला देने के बाद बताया कि वह राजाराम था। संतोष ने बताया कि वे पहले केस दर्ज कराने के लिए थाने गए तो पुलिस ने भगा दिया।

राजाराम के खिलाफ किसी भी थाने में कोई केस दर्ज नहीं था। वह पुलिसवालों के घर भी फर्नीचर की मरम्मत का काम करता था। इसके बावजूद उसे लुटेरा बताकर एनकाउंटर में उसकी हत्या की। पुलिसवाले उसे पहचानते थे, फिर भी शव की शिनाख्त नहीं की और अज्ञात में दाह संस्कार किया। उसके परिजनों को उसके मर जाने की सूचना भी नहीं दी। कोर्ट में पुलिस न तो उसे लुटेरा साबित कर सकी और न ही एनकाउंटर को असली।

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